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वकील रखने की हैसियत में नहीं रहे मो. शहाबुद्दीन

Written by  लीड इंडिया, Mail Us: info@leadindiagroup.com Published in Others Thursday, 19 July 2012 06:16

पटना।। कभी राम जेठमलानी को अपना वकील रखने वाले सिवान के पूर्व सासद मो. शहाबुद्दीन की माली हालत इतनी खराब हो जाएगी, किसी ने सोचा भी नहीं होगा। नौ साल से लगातार जेल में रहने वाले शहाबुद्दीन आपराधिक मामलों से इस प्रकार दब गए हैं कि वे अब वकील रखने लायक भी नहीं रहे हैं। पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश शिवाजी पांडेय को जब यह जानकारी मिली, तो वे भी हैरान हो गए।

दरअसल, सिवान के जिलाधिकारी ने निचली अदालत के एक फैसले को यहां चुनौती है। सिवान के एडीजे एसके पांडेय ने पिछले 14 जून को पूर्व राजद सांसद को मनमाफिक वकील मुहैया कराने का आदेश राज्य सरकार को दिया था। इस आदेश पर पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम रोक लगाते हुए शहाबुद्दीन को नोटिस जारी की है। उनसे जानकारी मांगी गयी है कि क्या वे सचमुच आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं? जवाब आने के बाद हाईकोर्ट तय करेगा कि क्या पूर्व सांसद सचमुच वकील रखने की हैसियत में नहीं हैं?

शहाबुद्दीन, 2004 से जेल में बंद हैं। जेल जाने के पहले और जेल में रहते हुए उन्होंने एक से बढ़कर एक नामी वकील रखे। उनके मुकदमे की पैरवी करने वाले एक अधिवक्ता इस समय पटना हाईकोर्ट के जज हैं। पटना हाईकोर्ट के यदुवंश गिरि एवं योगेश चन्द्र वर्मा जैसे वरीय अधिवक्ता भी कभी शहाबुद्दीन के मुकदमों की पैरवी कर चुके हैं।

 बहरहाल, राज्य सरकार की अपील पर अपना पक्ष रखते हुए अधिवक्ता श्यामेश्वर दयाल ने शहाबुद्दीन की आर्थिक तंगी को ढकोसला करार दिया। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन की हैसियत को कम में नहीं आंका जाना चाहिए। वे आर्थिक रूप से सम्पन्न हैं। उनकी पैतृक सम्पत्ति भी कम नहीं है। पूर्व सांसद होने के नाते पेंशन भी मिलता है। दयाल ने बताया कि फिलहाल पूर्व सांसद के खिलाफ 30 केस मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित हैं। 15 सेशन अदालत में है, जबकि 11 में ट्रायल चल रहा है। चार में अपील दायर की गयी है। उन्होंने कहा कि पूर्व सांसद को वकील का एक पैनल दिया गया था। उसमें से एक वकील को चुनना था। उन्होंने एक का चयन किया। वे पहले भी शहाबुद्दीन के वकील रह चुके है। यदि कोर्ट का आदेश हुआ तो वकील का खर्च अब राज्य सरकार को देना होगा।

Read 7259 times Last modified on Wednesday, 16 October 2013 11:40

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