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खुशी है माना जाता मुझे 'मोस्ट इलिजिबुल बैचलर'

Written by  Published in Entertainment Thursday, 19 July 2012 06:11

पटना।। वह इन दिनों 'मोस्ट इलिजिबुल बैचलर' ( 31 साल के), 'क्यूट' और 'चाकलेटी' जैसे संबोधनों / तारीफों (काम्प्लीमेंट) के पठार पर हैं। 

 

- कैसा लगता है अपने बारे में यह सब सुनकर?

 

- जाहिर है बहुत अच्छा

 

जवाब दिया- थियेटर व्यक्तित्व और महानतम रंगकर्मी पृथ्वीराज कपूर के परपोते, ग्रेट शो मैन राजकपूर के पोते, अपने दौर के प्लेब्याय ऋषि कपूर और नीतू सिंह के बेटे रणवीर कपूर ने

 

उन्होंने कहा-' पीछे इतनी बड़ी विरासत का होना कुछ बड़ी जिम्मेदारियों का एहसास भी कराता है। गर्व तो होता ही है।'

 

'सांवरिया', 'बचना ए हसीनों', बर्फी, रॉकस्टार, 'अजब प्रेम की गजब कहानी', 'यह जवानी है दीवानी' आदि फिल्मों से मशहूर पांच फिल्म फेयर अवार्ड पा चुके बॉलीवुड सितारे रणवीर कपूर , रविवार को पटना थे।

 

वह दो अक्टूबर को रिलीज हो रही अपनी फिल्म 'बेशर्म' के लिए, देखने वालों की चाहत और बाजार उकसाने यानी प्रमोशन के लिए यहां आए थे।

 

मीडिया से मिलने का वेन्यू और समय भी सुबह से ही उनके मैनेजरों द्वारा दो बार बदला गया। मुलाकात भी तय वैन्यू के अलग- अलग तल्लों पर किस्तों में हुई। सुरक्षा के लिए तैनात जिम में सजी देह वाले जवानों और पुलिस वालों के बीच से होकर।

 

एक्जीविशन रोड पर दोपहर बाद के 12.30 बजे से ही खासी भीड़ जमा हो गई थी। बार- बार हटाने के बावजूद होटल के स्टेनलेस स्टील वाले गेट को कुछ लड़कियों ने कचकचा कर पकड़ लिया था, ताकि कोई झटका झेल सकें। किसी के हाथ में तकिए के नीचे रख कर सोई गई फिल्मी पत्रिका का मुखपृष्ठ था- जिसपर रणवीर की चहकती तस्वीर थी। पुलिस वाले होटल तक आने वाली सड़क को क्लीयर करने में लगे थे। संवाददाताओं से उनकी मुलाकात अपराह्न चार बजे हो सकी।

 

एक रटा- रटाया सा वाक्य एक सांस में वह बोल गए- 'नमस्कार, हलो, शुक्रिया.. 2 अक्टूबर को मेरी फिल्म 'बेशर्म' रिलीज हो रही है। फेमिली इन्टरटेनर है, जरूर देखियेगा..थियेटर जाइएगा। ( लक्स होजरी की डीलर मीट में भी शब्दश: यही कहा था)

 

- आप कितने बेशर्म हैं?

 

- मैं तो लाइफ में बहुत शर्मीला हूं। सच कह रहा हूं। बेशर्म नहीं हो सका। यह मसाला फिल्म है। मनोरंजक है। खास बात यह कि इसमें मम्मी- पापा ( नीतू सिंह- ऋषि कपूर) के साथ काम करने का मौका मिला है। बचपन से उनसे सीखता आ रहा हूं। बहुत सपोर्ट रहा है उनका। इस फिल्म में हमारे रोल में बहुत कामेडी है। फिल्म में एक किरदार बबली है। जो अनाथ है। लाउड और रिपल्सिव भी है। वह वही करता है जो उसका दिल करता है।

 

- आपने गांधी को बेशर्म कहा था

 

- नहीं मुझे गलत कोट किया गया। दरअसल दिल से बेशर्म होना अलग बात है। इसका मतलब कोई क्या कह रहा है इसकी फिक्र न करना और खुद की ही सुनना। चरित्र से बेशर्मी का मतलब नंगा हो जाना है। मैंने गांधी के चरित्र पर कुछ नहीं कहा।

 

-आपके सामने दुनिया की किसी भाषाई फिल्म के मुकाबले सबसे ज्यादा देखी गई आर. के. बैनर की लाइफ टाइम ग्रेट फिल्म 'आवारा' का 'आवारा हूं..' गाना बजाया जाए तो कैसे रिएक्ट करेंगे? देह से इमोशन से भी?

 

- वाऊ ! बहुत अच्छा लगता है, यह गाना। इसे सुनता हूं। राजकपूर साहब मेरे आइडियल हैं।

 

मौजूद लोगों में से किसी ने कहा- क्या आप उनकी किसी मशहूर फिल्म आवारा, श्री चार सौ बीस, छलिया, जागते रहो, अनाड़ी, तीसरी कसम- किसी भी फिल्म के किसी दृश्य या गाने पर एक्ट कर सकते हैं? डायलाग सुना सकते हैं?

 

वह कुछ देर तक सोचते रहे। फिर कहा-मेरा नाम जोकर का एक डायलॉग सुनाऊं। लोगों के हां कहने पर जो सुनाया कुछ के लिए दुखद था। 'हां बाबू ये सर्कस है शो तीन घंटे का...' इसमें कुछ लाइनें उन्होंने खुद जोड़ दी थीं।

 

- दीपिका से ब्रेकअप.. 

 

- जितना अपनी पर्सनल लाइफ को प्रोटेक्ट कर सकता हूं, करता हूं। दूसरी बात करें।

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